नई दिल्ली : दिल्ली की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में पारदर्शिता की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाख़िल की गई है. यह याचिका जानी-मानी वकील और अधिकार कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज और अमृता जोहरी ने सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण के ज़रिए दायर की है. सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर 22 सितंबर को सुनवाई करने की बात कही है.
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याचिका में मांग की गई है कि एसआईआर के तहत नोटिस पाने वाले 33 लाख से ज़्यादा मतदाताओं की सूची सार्वजनिक की जाए. साथ ही, चुनाव आयोग से यह स्पष्ट करने की मांग की गई है कि ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसीज़ (तार्किक खामियां)’ किसे माना जाएगा और इसके लिए क्या मानदंड तय किए गए हैं. याचिकाकर्ताओं के मुताबिक़, नोटिस में मतदाताओं को नोटिस जारी करने के कारण स्पष्ट रूप से बताए जाने चाहिए. साथ ही पर्याप्त और उचित नोटिस दिए बिना किसी मतदाता का नाम मतदाता सूची से न हटाए जाने की मांग की है.
किन आधार पर नोटिस दिए गए
याचिका के मुताबिक़, दिल्ली की ड्राफ्ट मतदाता सूची में एन्यूमरेशन चरण के बाद 97.5 लाख मतदाता शामिल हैं. इनमें से 33.13 लाख से ज़्यादा मतदाताओं को ‘नो मैपिंग’ या ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसीज़’ के आधार पर नोटिस जारी किए गए हैं. इनमें करीब 13.8 लाख मतदाता ‘नो मैपिंग’ और 19.33 लाख ‘तार्किक खामियों’ श्रेणी में हैं.
याचिकाकर्ताओं ने ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसीज़’ की श्रेणी के लिए आधिकारिक परिभाषा, मानदंड, एल्गोरिद्म से जुड़े पैरामीटर और संचालन संबंधी दिशा-निर्देश सार्वजनिक करने की मांग की है. उनका कहना है कि मतदाताओं को जारी नोटिस में कई मामलों में केवल सामान्य आधार बताए गए हैं, जिससे संबंधित मतदाता यह समझ नहीं पाते कि उनके ख़िलाफ़ किस तथ्य या रिकॉर्ड के आधार पर कार्रवाई की जा रही है.
सीजेआई सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना की तीन सदस्यीय पीठ एसआईआर से जुड़ी अन्य याचिकाओं के साथ इस पर सुनवाई करेगी. अंजलि भारद्वाज ने कहा है कि चुनाव आयोग को अपारदर्शी और मनमाने तरीक़े से एसआईआर कराने की इजाज़त नहीं दी जा सकती.