दो हज़ार रुपये से अधिक की इस यूपीआई पेमेंट पर लगेगा चार्ज, कांग्रेस का ये आरोप

नई दिल्ली : नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशंस ऑफ़ इंडिया (एनपीसीआई) ने यूपीआई पेमेंट को लेकर एक बड़ी घोषणा की है. अब 2000 रुपये से ऊपर की पर्सन्स टू मर्चेंट (पी2एम) यूपीआई पेमेंट पर 0.4 % की फ़ीस लगेगी और 75 हज़ार रुपये या उससे अधिक की पेमेंट पर 300 रुपये से ज़्यादा फ़ीस नहीं लगेगी. यहां यह बताना बेहद ज़रूरी है कि यह शुल्क मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) है.

एमडीआर वह शुल्क है जो पेमेंट सिस्टम में मर्चेंट की तरफ़ से बैंक और दूसरे पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को दिया जाता है, न कि यूज़र्स से लिया जाता है. इस लिहाज़ से यूपीआई पेमेंट पर इस तरह के चार्ज लगने का सीधे तौर पर आम उपभोक्ताओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

एनपीसीआई ने बयान में बताया है कि इस ढांचे के तहत 2,000 रुपये से कम के 95% से कम मूल्य वाले यूपीआई लेनदेन और छोटे व्यापारियों के लेनदेन (पी2पीएम) को पूरी तरह से मुफ्त रखा गया है, और छोटे व्यापारियों के बीच यूपीआई स्वीकार्यता के विस्तार का समर्थन करने के लिए एक नए फंड का प्रस्ताव किया गया है.

एनपीसीआई ने अपने ताज़ा बयान में अलग-अलग तरह की पेमेंट पर लगने वाले चार्ज के बारे में विस्तार से जानकारी दी है. जैसे-

  • ग्राहक हमेशा की तरह यूपीआई का उपयोग करके बिना किसी लागत के लेनदेन करना जारी रखेंगे. 2,000 रुपये तक के पर्सन-टू-पर्सन (पी2पी) लेनदेन और पर्सन-टू-मर्चेंट (पी2एम) लेनदेन एमडीआर के दायरे से बाहर रहेंगे.
  • पर्सन-टू-पर्सन मर्चेंट (पर्सन2पीएम) ढांचे के तहत काम करने वाले छोटे व्यापारियों को ज़ीरो एमडीआर का फ़ायदा मिलना जारी रहेगा. यह कैटेगरी उन छोटे वेंडर्स का समर्थन करती है जो यूपीआई क्यूआर भुगतानों के ज़रिए सीधे अपने बैंक खातों में हर महीने एक लाख रुपये तक हासिल करते हैं, जिससे असंगठित खुदरा क्षेत्र में डिजिटल भुगतान की स्वीकार्यता को बढ़ावा मिलता है.
  • डिजिटल भुगतान को और तेज़ी से अपनाने के लिए, छोटे व्यापारियों के लिए एक समर्पित फंड स्थापित किया जाएगा जो मौजूदा व्यापारियों और टियर 3 और छोटे बाज़ारों में डिजिटल भुगतान के बुनियादी ढांचे का समर्थन करेगा.
  • स्पेसिफ़ाइड मर्चेंट श्रेणियां जैसे रेलवे, टेलीकॉम सेवाएं, बीमा और ईंधन में 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतानों पर प्रति लेनदेन 5 रुपये का फ्लैट एमडीआर लागू होगा.
  • 2,000 रुपये से अधिक के पी2एम यूपीआई लेनदेन पर 0.4% का एमडीआर लागू होगा, जिसमें प्रति लेनदेन एमडीआर की अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है.
  • सभी व्यापारियों के लिए 2,000 रुपये तक के कम-मूल्य वाले यूपीआई लेनदेन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, जो सभी यूपीआई पी2एम लेनदेन का 95% से अधिक हिस्सा हैं.
  • संशोधित यूपीआई एमडीआर, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड और वॉलेट सहित कई अन्य डिजिटल भुगतान माध्यमों से जुड़े शुल्कों की तुलना में कम बना हुआ है.

कांग्रेस ने केंद्र की मोदी सरकार पर जनता से यूपीआई पेमेंट के ज़रिए वसूली की तैयारी करने का आरोप लगाया था.

पार्टी ने दावा किया था कि सरकार 2,000 रुपये से अधिक के हर यूपीआई पेमेंट पर 0.5 प्रतिशत चार्ज लगाने की योजना बना रही है.

दरअसल, 14 सितंबर 2026 को जारी सरकारी अधिसूचना के अनुसार, दो हज़ार रुपये तक के यूपीआई पेमेंट पर किसी भी तरह का चार्ज नहीं लगेगा.

कांग्रेस का कहना था कि यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो 5,000 रुपये के यूपीआई पेमेंट पर 25 रुपये का अतिरिक्त चार्ज देना होगा.

कांग्रेस ने एक्स पर लिखा था, “नरेंद्र मोदी जनता से वसूली का नया प्लान लाए हैं. अब 2,000 रुपये से ऊपर के यूपीआई पेमेंट पर सरकार वसूली करेगी. प्लान है कि ₹2,000 से ऊपर के हर यूपीआई पेमेंट पर 0.5% चार्ज वसूला जाए. इसका मतलब है कि अगर आपने 5,000 रुपये की खरीदारी की तो 25 रुपये का चार्ज लगेगा. अगर 10,000 रुपये की खरीदारी की तो 50 रुपये वसूला जाएगा.”

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